Oct 19, 2016 · 1 min read

राजयोगमहागीता: वासुदेव,केशवकीमाधवकीमोहिनीसी:: जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट५३) घनाक्षरी

प्रभु प्रणाम: घनाक्षरी – २
—————————-
वासुदेव, केशव की, माधव की मोहिनी – सी ,
मोहती जो मोहन की छवि अति प्यारी है ।
अजर, अव्यग्र, अज, देवकी के वत्स कृष्ण ,
प्रभु दिव्य– रस के रसिक गिरिधारी हैं ।
अमर , अव्यग्र, ह्रषीकेश जो विराट प्रभु,
साक्षी की सॉवरी– सी सूरत शुचि न्यारी है ।
करता प्रणाम उन्हें ” कमल आनंद ” आज ,
वृन्दावन विहारी जो अजिर।बिहारी हैं ।।

—– जितेन्द्र कमल आनंद

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