यादों की गठरी

उन्हें याद नहीं आती हमारी, गुरुर में,
वो खोये है जाने किस सुरूर में।

जिस वक़्त के लम्हात ने हमको रुलाया है,
उस वक़्त का झोंका तेरी गली में आया है।

इस बार तेरी यादों की गठरी बनाएंगे,
ख़ुद भी जलेंगे और तेरी यादें जलाएँगे।

इस बार जो हम रूठे तो ऐसे रूठ जाएंगे
वहां चले जाएगे जहां आप मनाने नही आ पाएंगे।

हर बार हम रोये तो तुम कीमत न जानोगी,
हमारी याद मैं तुम्हें रुलाकर अश्कों की कीमत बताएंगे।

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