Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

यह कैसी ज़िंदगानी ?

पहले बरसात होती थी मस्त
अब तो मानसून से पूर्व की
बारिश ने ही
इतनी उद्धम मचाई है
कि दिल, घर, बाज़ार
सब जगह ही
पानी ही पानी….
पानी-पानी-पानी….
कि हुई पानी-पानी
यह कैसी ज़िंदगानी ?
छुई-अनछुई !

4 Likes · 6 Comments · 161 Views
You may also like:
आपकी याद को कहां रख दें
Dr fauzia Naseem shad
मृत्यु
AMRESH KUMAR VERMA
सच और झूठ
श्री रमण 'श्रीपद्'
पिता का सपना
श्री रमण 'श्रीपद्'
[ कुण्डलिया]
शेख़ जाफ़र खान
आंखों में जब
Dr fauzia Naseem shad
सुकून
Harshvardhan "आवारा"
काश ! तेरी निगाह मेरे से मिल जाती
Ram Krishan Rastogi
गरीबी तमाशा बना
Dr fauzia Naseem shad
इज़हार-ए-इश्क 2
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
ईमानदारी
Utsav Kumar Aarya
✍️बचा लेना✍️
'अशांत' शेखर
मैं परछाइयों की भी कद्र करता हूं
VINOD KUMAR CHAUHAN
✍️औरत हूँ ✍️
'अशांत' शेखर
"पिता की क्षमता"
पंकज कुमार "कर्ण"
भगवान हमारे पापा हैं
Lucky Rajesh
गुरु चरण
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
हर किसी की बात नही
Anamika Singh
इरादा
Shivam Sharma
'प्यारी ऋतुएँ'
Godambari Negi
भक्त कवि स्वर्गीय श्री रविदेव_रामायणी*
Ravi Prakash
सास-बहू
Rashmi Sanjay
राई का पहाड़
Sangeeta Darak maheshwari
पति पत्नी पर हास्य व्यंग
Ram Krishan Rastogi
कैसा मोजिजा है।
Taj Mohammad
राह जो तकने लगे हैं by Vinit Singh Shayar
Vinit kumar
मंजिल की तलाश
AMRESH KUMAR VERMA
जीवन की तलाश
Taran Singh Verma
नदी की पपड़ी उखड़ी / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
अपनी भाषा
मनमोहन लाल गुप्ता अंजुम
Loading...