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2 Oct 2016 · 1 min read

यथार्थ

क्या साथ लाएं थे
क्या साथ ले जाएंगे
कहते अक्सर लोग
जूठे लोग
झूठा जीवन
जीते लोग
सब जानते हैं
न जाने कितने
अपूर्ण सपने
अधूरी ख्वाहिशें
असंख्य अनकही बातें
साथ जाएंगी
जगत से अज्ञात
जगत के लिए।

-डॉ विजेंद्र प्रताप सिंह

Language: Hindi
Tag: कविता
204 Views
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