Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings
Aug 27, 2016 · 1 min read

मैं हूँ दीप वो जो सदा ही जला हूँ।

नहीं मैं रुकूंगा नहीं मैं रुका हूँ।
सचाई के पथ पर सदा ही चला हूँ।।

कमी ढूँढने में लगे क्यूं हो मेरी।
कहा कब है मैनें कि मै देवता हूँ।।

मुझे मुफलिसी का तजुर्बा बहुत है।
अभावों में रहकर सदा ही पला हूँ।।

कभी गैर धोखा नहीं दे सका है।
मैं अपनों के हाथों हमेशा लुटा हूँ।।

सितम जुल्म मुझको झुका न सकेंगे।
मैं हूँ दीप वो जो सदा ही जला हूँ।।

1 Comment · 217 Views
You may also like:
पिता की छांव
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
इश्क करते रहिए
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
✍️हिसाब ✍️
Vaishnavi Gupta
मुँह इंदियारे जागे दद्दा / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
उफ ! ये गर्मी, हाय ! गर्मी / (गर्मी का...
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बताओ तो जाने
Ram Krishan Rastogi
।। मेरे तात ।।
Akash Yadav
अपने दिल को ही
Dr fauzia Naseem shad
मुझको कबतक रोकोगे
Abhishek Pandey Abhi
तीन किताबें
Buddha Prakash
वाक्य से पोथी पढ़
शेख़ जाफ़र खान
✍️ईश्वर का साथ ✍️
Vaishnavi Gupta
कण-कण तेरे रूप
श्री रमण 'श्रीपद्'
गर्मी का कहर
Ram Krishan Rastogi
सपनों में खोए अपने
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
✍️पढ़ रही हूं ✍️
Vaishnavi Gupta
दर्द अपना है तो
Dr fauzia Naseem shad
बाबू जी
Anoop Sonsi
पिता का साया हूँ
N.ksahu0007@writer
गुरुजी!
Vishnu Prasad 'panchotiya'
मृगतृष्णा / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
अपनी आदत में
Dr fauzia Naseem shad
नदी की अभिलाषा / (गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
माँ की याद
Meenakshi Nagar
वेदों की जननी... नमन तुझे,
मनोज कर्ण
ऐ ज़िन्दगी तुझे
Dr fauzia Naseem shad
प्यार में तुम्हें ईश्वर बना लूँ, वह मैं नहीं हूँ
Anamika Singh
जिन्दगी का जमूरा
Anamika Singh
छीन लेता है साथ अपनो का
Dr fauzia Naseem shad
कोई मंझधार में पड़ा हैं
VINOD KUMAR CHAUHAN
Loading...