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15 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-128💐

मैं हूँ उनका विसाल^ वो मेरे,हाँ वो मेरे।
बचा बस है इश्क़ में दूरियों का ज़ुल्म।

^आपस में मिल जाना,तलब

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
155 Views
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