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5 Mar 2023 · 1 min read

💐प्रेम कौतुक-344💐

मैंने उन्हें अपने इश्क़ का रुदाली न बनाया,
मैंने कहा मैं तो धूप सा तुम बनो मेरी छाया,
हर शाम अब ज़िंदगी की कसका ही करेगी,
रूह तो गई कहीं अब बची है यह फानी काया।

©®अभिषेक: पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
46 Views
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