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16 Mar 2023 · 1 min read

💐प्रेम कौतुक-448💐

मेरे हर जज़्बात उनके ज़ेहन से मिलते हैं,
फिर भी न क्यों, वो कभी हमसे मिलते हैं,
सब सजाया गया है,उनके हिस्से का अदब,
देखते रहते हैं वो, फिर भी क्यों न मिलते हैं।

©®अभिषेक: पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
1 Like · 215 Views
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