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27 Jun 2016 · 1 min read

मेरे सपनो के भारत में…

??मेरे सपनो का भारत??
–-–-–-–-–-–-–-–-–-–-–-–-–-–-–-–-
मेरे सपनो के भारत में ,
भारत ये विश्वगुरु होगा ।
सभी अधूरे स्वप्न धरा का,
निश्चय ही आज शुरू होगा ।।

करवट लेकर ऊब गया वक्त,
अब रात भी जैसे दिन होगा ।
चप्पा चप्पा मातृभूमि का
अब लाल रंग के बिन होगा ।।

वीरों के वो कुर्बानी को ,
जाया ना हम होने देंगे ।
भारत माता की धरती को ,
और नहीं रोने देंगे ।।

आच्छादित अन्याय धरा पर ,
दमित स्वतः हो जाएगा ।
खुशहाली के हरा रंग हर,
मस्तक पर छा जायेगा ।।

युक्ति संगत शिक्षा दीक्षा,
और पठन पाठन होगा ।
रोजगार के अवसर और,
हर तबके में साधन होगा ।।

भय के सम्मुख ज्ञान यज्ञ ,
हर मस्तक पर धारण होगा ।
संरक्षित हर मानव और,
समृद्ध हरेक मानस होगा ।।

मेरे सपनो के भारत में ,
भारत विश्वगुरु होगा ।
सभी अधूरे स्वप्न पुनः ,
निश्चय ही आज शुरू होगा ।।

??सामरिक अरुण??
21 जनवरी 2016

Language: Hindi
Tag: कविता
152 Views
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