Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-63💐

मेरे दिल की धड़कने फिर बढ़ीं,
उन्होंने फिर मुझे याद किया।

©®अभिषेक: पाराशरः’आनन्द’

Language: Hindi
52 Views
You may also like:
💐प्रेम कौतुक-343💐
💐प्रेम कौतुक-343💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
जबकि मैं इस कोशिश में नहीं हूँ
जबकि मैं इस कोशिश में नहीं हूँ
gurudeenverma198
कहाँ लिखता है
कहाँ लिखता है
Mahendra Narayan
कहती है हमें अपनी कविताओं में तो उतार कर देख लो मेरा रूप यौव
कहती है हमें अपनी कविताओं में तो उतार कर देख लो मेरा रूप यौव
DrLakshman Jha Parimal
पिता बनाम बाप
पिता बनाम बाप
Sandeep Pande
कट रही हैं दिन तेरे बिन
कट रही हैं दिन तेरे बिन
Shakil Alam
"उतना ही दिख"
Dr. Kishan tandon kranti
आप अपने मन को नियंत्रित करना सीख जाइए,
आप अपने मन को नियंत्रित करना सीख जाइए,
Mukul Koushik
* बहुत खुशहाल है साम्राज्य उसका
* बहुत खुशहाल है साम्राज्य उसका
Shubham Pandey (S P)
संसद की दिशा
संसद की दिशा
Shekhar Chandra Mitra
हालात और मुकद्दर का
हालात और मुकद्दर का
Dr fauzia Naseem shad
सत्ता परिवर्तन
सत्ता परिवर्तन
Bodhisatva kastooriya
कहीं भी जाइए
कहीं भी जाइए
Ranjana Verma
तन्हाई
तन्हाई
Sidhartha Mishra
चट्टानी अडान के आगे शत्रु भी झुक जाते हैं, हौसला बुलंद हो तो
चट्टानी अडान के आगे शत्रु भी झुक जाते हैं, हौसला बुलंद हो तो
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
मेवाडी पगड़ी की गाथा
मेवाडी पगड़ी की गाथा
Anil chobisa
अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस
अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस
डॉ.सीमा अग्रवाल
Tum likhte raho mai padhti rahu
Tum likhte raho mai padhti rahu
Sakshi Tripathi
धोखा
धोखा
Sanjay
धूम मची चहुँ ओर है, होली का हुड़दंग ।
धूम मची चहुँ ओर है, होली का हुड़दंग ।
Arvind trivedi
फटे रह गए मुंह दुनिया के, फटी रह गईं आंखें दंग।
फटे रह गए मुंह दुनिया के, फटी रह गईं आंखें दंग।
*Author प्रणय प्रभात*
आने वाला कल दुनिया में, मुसीबतों का कल होगा
आने वाला कल दुनिया में, मुसीबतों का कल होगा
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
जिस समाज में आप पैदा हुए उस समाज ने आपको कितनी स्वंत्रता दी
जिस समाज में आप पैदा हुए उस समाज ने आपको कितनी स्वंत्रता दी
Utkarsh Dubey “Kokil”
सलाह
सलाह
श्याम सिंह बिष्ट
बैरी डायबिटीज (हास्य कुंडलिया)
बैरी डायबिटीज (हास्य कुंडलिया)
Ravi Prakash
You have to commit yourself to achieving the dreams that you
You have to commit yourself to achieving the dreams that you
पूर्वार्थ
आश पराई छोड़ दो,
आश पराई छोड़ दो,
Satish Srijan
विचार
विचार
आकांक्षा राय
क्यूँ ना करूँ शुक्र खुदा का
क्यूँ ना करूँ शुक्र खुदा का
shabina. Naaz
मीलों का सफर तय किया है हमने
मीलों का सफर तय किया है हमने
कवि दीपक बवेजा
Loading...