Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

मेरा ठिकाना-4—मुक्तक—डी के निवातियाँ

क्या करोगे जानकर तुम मेरा ठिकाना
मैं ठहरा घुमक्कड़ रिवाजो का दीवाना
रहता हूँ सफर -ऐ- जिंदगी में देह संग
जाने कब छूट जाये ये मृद आशियाना !!
!
!!
!!!
डी के निवातियाँ______!!!

129 Views
You may also like:
दिल टूट करके।
Taj Mohammad
विचलित मन
AMRESH KUMAR VERMA
✍️जीवन की ऊर्जा है पिता...!✍️
"अशांत" शेखर
कलम की वेदना (गीत)
सूरज राम आदित्य (Suraj Ram Aditya)
धीरे-धीरे कदम बढ़ाना
Anamika Singh
अल्फाज़ ए ताज भाग-5
Taj Mohammad
हमारें रिश्ते का नाम।
Taj Mohammad
विलुप्त होती हंसी
Dr Meenu Poonia
फूलो की कहानी,मेरी जुबानी
Anamika Singh
नुमाइश बना दी तुने I
Dr.sima
सिंधु का विस्तार देखो
surenderpal vaidya
मुकद्दर ने
Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI
*!* सोच नहीं कमजोर है तू *!*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
भारत लोकतंत्र एक पर्याय
Rj Anand Prajapati
दौर-ए-सफर
DESH RAJ
नर्मदा के घाट पर / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
कनिष्ठ रूप में
श्री रमण
श्रीराम धरा पर आए थे
सिद्धार्थ गोरखपुरी
'आप नहीं आएंगे अब पापा'
alkaagarwal.ag
मातृ रूप
श्री रमण
✍️जंग टल जाये तो बेहतर है✍️
"अशांत" शेखर
पिता
Madhu Sethi
कौन किसके बिन अधूरा है
Ram Krishan Rastogi
कहां जीवन है ?
Saraswati Bajpai
✍️झूठा सच✍️
"अशांत" शेखर
रिश्तों की कसौटी
VINOD KUMAR CHAUHAN
प्रेम
Rashmi Sanjay
धोखा
Anamika Singh
उफ ! ये गर्मी, हाय ! गर्मी / (गर्मी का...
ईश्वर दयाल गोस्वामी
महेनतकश इंसान हैं ... नहीं कोई मज़दूर....
Dr. Alpa H. Amin
Loading...