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27 May 2016 · 1 min read

मुश्किलो ने कहाँ,क्यूँ तू रूकता नही

मुश्किलो ने कहाँ,क्यूँ तू रूकता नही,
दिन रात चलने पर भी क्यूँ तू थकता नही।
विश्वास से पूरित तेरा मुख दिख रहा है,
साधना की कलम से किस्मत लिख रहा है।
लोभ,मोह के आगे भी अब तू झुकता नही,
मुश्किलो ने कहाँ,क्यूँ तू रूकता नही।

हँसकर कहाँ मैंने अब न रूकना मुझे ,
भले तुम आती जाओ अब न झुकना मुझे।
मैं चलूँगा,बढूँगा,और बढता ही रहूँगा,
संघर्षो में तपकर निखरता ही रहूँगा।
हार जाने के डर से अब मैं डरता नही,
मुश्किलो ने कहाँ,क्युँ तू रूकता नही|
-वीर सिंह

Language: Hindi
Tag: कविता
303 Views
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