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16 Jun 2019 · 1 min read

#ग़ज़ल-26

मुमकिन है हर काम हँसके लीजिएगा
गर्दिश में भी आँख ना तुम मीचिएगा/1

तुम मय पीते शोक में हो है बहाना
अच्छा होगा दूर कमियाँ कीजिएगा/2

आँधी में भी जो जले दीपक लुभाए
अपने ग़म को जीत आशा दीजिएगा/3

बातें तेज़ी से बुरी ही हैं लुभाती
होगा मानवता हनन ना रीझिएगा/4

औरों को छोड़ो गिराना बस उठाओ
पानी में पानी मज़ा है सीजिएगा/5

क्या होती है ये छुअन हम क्या बताएँ
छूना साहिल तो लहर से पूछिएगा/6

प्रीतम औरों की ख़ुशी सबको जलाती
पर खुश होना वय बढ़ाता सीखिएगा/7

-आर.एस.’प्रीतम’
सर्वाधिकार सुरक्षित–radheys581@gmail.com

2 Likes · 1 Comment · 178 Views

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