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मुबारक

अपना बनकर डंसने वालों ,तुम्हे समयचक्र की बीन मुबारक।
तुमको तुम्हारी चुगली मुबारक ,मुझको मेरी तौहीन मुबारक।
मुझे गिराने के चक्कर मे क्या इतना गिरना जरूरी था,
मैं खुश रहने का आदी हूँ ,तुमको माहौल गमगीन मुबारक।
-सिद्धार्थ

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