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10 Jul 2022 · 1 min read

मुखौटा

#काव्यात्रा
#मुखौटा
०९/०७/२०२२

हैं कुछ चहरे अपने मुखौटों के सताए हुए ।
खुद अपने जख्मों पे नमक लगाए हुए ।।
अमूमन हैं चहरे पे मुखौटा लगाने वाले ।
कुछ तो हैं मुखौटे पे चहरा लगाए हुए ।।
खासमखासों में खास कोईभी शक्श नहीं ।
उतारा मौखौटा तो अपने भी पराए हुए ।।
बेमुखौटा शक्श देखने को तलबगार है नज़र ।
क्या तुम,क्या ज़माना सब है आजमाए हुए ।।
किसी ने नकाब तो किसी ने फरेब ओढ़ा ।
हमें बताओ तो कौन हैं बिना मुखौटा लगाए हुए ।।

संदीप सागर (चिराग)
लहरा _ फर्रुखाबाद
७८६०२३२३१३

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