Sep 6, 2016 · 1 min read

मुक्त काव्य

एक मुक्त काव्य…………
“कर्म ही फल बाग है”

भाग्य तो भाग्य है
कर्म ही तो फल बाग है
बारिश के जल जैसा
थैली में भर पैसा
ओढ़ ले पैसा ओढ़ा दे पैसा
पानी के जैसा बहा दे पैसा
किसका अनुभाग है
कर्म ही तो फल बाग है॥

कुंए का जल है परिश्रम
बारिश का नहाना बिना श्रम
भाग्य में यदा-कदा होती आसानी
बादल हमें रोज कब पहुंचाए पानी
भरोषे पर बैठना कितनी नादानी
दादी सुनाती कर्म-भाग्य की कहानी
अतीत से सबका अनुराग है
कर्म ही तो फल बाग है॥

धरती की हरियाली न्यारी
दाना-बीज क्यारी-क्यारी
खिले सरसों सरिष पीत फूल
कर्म विधि-विधान हवा बहे अनुकूल
भाग्य भरोसे की हवा बहती प्रतिकूल
सीख दे किसान सही जाय बड़ शूल
करम भाग्य का प्रभाग है
कर्म ही फल बाग है॥

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

157 Views
You may also like:
राम ! तुम घट-घट वासी
Saraswati Bajpai
सत्य भाष
AJAY AMITABH SUMAN
सरकारी निजीकरण।
Taj Mohammad
अखबार ए खास
AJAY AMITABH SUMAN
तोड़कर मुझे न देख
अरशद रसूल /Arshad Rasool
एक प्रेम पत्र
Rashmi Sanjay
"जीवन"
Archana Shukla "Abhidha"
विरह का सिरा
Rashmi Sanjay
मातृदिवस
Dr Archana Gupta
रोटी संग मरते देखा
शेख़ जाफ़र खान
पेड़ - बाल कविता
Kanchan Khanna
आज का विकास या भविष्य की चिंता
Vishnu Prasad 'panchotiya'
चेहरा अश्कों से नम था
Taj Mohammad
बुद्ध पूर्णिमा पर मेरे मन के उदगार
Ram Krishan Rastogi
समय और रिश्ते।
Anamika Singh
टूटता तारा
Anamika Singh
शिव शम्भु
Anamika Singh
हे तात ! कहा तुम चले गए...
मनोज कर्ण
कर्ज भरना पिता का न आसान है
आकाश महेशपुरी
दूजा नहीं रहता
अरशद रसूल /Arshad Rasool
'याद पापा आ गये मन ढाॅंपते से'
Rashmi Sanjay
श्रीराम
सुरेखा कादियान 'सृजना'
पत्ते ने अगर अपना रंग न बदला होता
Dr. Alpa H.
इश्क़ में क्या हार-जीत
N.ksahu0007@writer
रे बाबा कितना मुश्किल है गाड़ी चलाना
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
प्रारब्ध प्रबल है
सिद्धार्थ गोरखपुरी
ग्रीष्म ऋतु भाग 1
Vishnu Prasad 'panchotiya'
रावण का मकसद, मेरी कल्पना
Anamika Singh
रावण का प्रश्न
Anamika Singh
लिखे आज तक
सिद्धार्थ गोरखपुरी
Loading...