Sep 22, 2016 · 1 min read

मुक्तक

जब पुकारेगा खुदा सब कुछ धरा रह जायेगा
छोड़ दुनियाँ रूह से अपनी जुदा रह जायेगा
रुप अपना तू निखारे देख कर के आयना
एक तेरा रेत का महल ढला रह जायेगा

70 Likes · 222 Views
You may also like:
तुम धूप छांव मेरे हिस्से की
Saraswati Bajpai
नैतिकता और सेक्स संतुष्टि का रिलेशनशिप क्या है ?
Deepak Kohli
मां-बाप
Taj Mohammad
दाता
निकेश कुमार ठाकुर
बेटी का पत्र माँ के नाम (भाग २)
Anamika Singh
सोए है जो कब्रों में।
Taj Mohammad
दुविधा
Shyam Sundar Subramanian
*साधुता और सद्भाव के पर्याय श्री निर्भय सरन गुप्ता :...
Ravi Prakash
बाबासाहेब 'अंबेडकर '
Buddha Prakash
पिता के रिश्ते में फर्क होता है।
Taj Mohammad
शहीद रामचन्द्र विद्यार्थी
Jatashankar Prajapati
मेरे बुद्ध महान !
मनोज कर्ण
श्रीराम धरा पर आए थे
सिद्धार्थ गोरखपुरी
एक मुर्गी की दर्द भरी दास्तां
ओनिका सेतिया 'अनु '
श्रमिक जो हूँ मैं तो...
मनोज कर्ण
दोस्त जीवन में एक सच्चा दोस्त ज़रूर कमाना….
Piyush Goel
पितु संग बचपन
मनोज कर्ण
मिला है जब से साथ तुम्हारा
Ram Krishan Rastogi
प्रेम...
Sapna K S
हसद
Alok Saxena
दुर्योधन कब मिट पाया:भाग:36
AJAY AMITABH SUMAN
पिता
Manisha Manjari
देवता सो गये : देवता जाग गये!
ज्ञानीचोर ज्ञानीचोर
न तुमने कुछ न मैने कुछ कहा है
ananya rai parashar
नियमित बनाम नियोजित(मरणशील बनाम प्रगतिशील)
Sahil
अजब कहानी है।
Taj Mohammad
मेरे पापा
ओनिका सेतिया 'अनु '
【1】*!* भेद न कर बेटा - बेटी मैं *!*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
नर्सिंग दिवस विशेष
हरीश सुवासिया
आसान नहीं होता है पिता बन पाना
Poetry By Satendra
Loading...