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Sep 29, 2017 · 1 min read

मुक्तक

तुमको देखकर मेरा दिल मचलता है!
तुमको सोचकर मेरा दिल बहलता है!
कैसे मैं लगाऊँ जख्मों पर बंदिशें?
मुझको गमें-ख्याल दिन रात कुचलता है!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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