Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings

मुक्तक

मुक्तक
सजा कर प्रीत के सपने लिए तस्वीर बैठे हैं।
इबादत में सनम तुझको बना तकदीर बैठे हैं।
छलावा कर रही दुनिया यहाँ जज़्बात झूठे हैं-
बने रांझा मुहोब्बत में समझ कर हीर बैठे हैं।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी(मो.-9839664017)

205 Views
You may also like:
✍️फिर बच्चे बन जाते ✍️
Vaishnavi Gupta
रिश्तों की डोर
मनोज कर्ण
इश्क कोई बुरी बात नहीं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
पिता
Neha Sharma
"निर्झर"
Ajit Kumar "Karn"
पिता
Aruna Dogra Sharma
मेरी अभिलाषा
Anamika Singh
माखन चोर
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
✍️पढ़ रही हूं ✍️
Vaishnavi Gupta
Security Guard
Buddha Prakash
मेरे पिता
rubichetanshukla रुबी चेतन शुक्ला
पिता की याद
Meenakshi Nagar
आसान नहीं होता है पिता बन पाना
Poetry By Satendra
दिल का यह
Dr fauzia Naseem shad
मुर्गा बेचारा...
मनोज कर्ण
जितनी मीठी ज़ुबान रक्खेंगे
Dr fauzia Naseem shad
मेरी भोली ''माँ''
पाण्डेय चिदानन्द
प्रेम में त्याग
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
पिता
Saraswati Bajpai
बाबू जी
Anoop Sonsi
हमें क़िस्मत ने आज़माया है ।
Dr fauzia Naseem shad
मेरे पिता है प्यारे पिता
Vishnu Prasad 'panchotiya'
बुद्ध भगवान की शिक्षाएं
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
✍️लक्ष्य ✍️
Vaishnavi Gupta
एसजेवीएन - बढ़ते कदम
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
नास्तिक सदा ही रहना...
मनोज कर्ण
फेसबुक की दुनिया
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
संकुचित हूं स्वयं में
Dr fauzia Naseem shad
पवनपुत्र, हे ! अंजनि नंदन ....
ईश्वर दयाल गोस्वामी
सिर्फ तुम
Seema 'Tu haina'
Loading...