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Jun 16, 2021 · 1 min read

मुक्तक

तुम्हें अब दास्तां अपनी सुनाने मैं न आऊंगा
चले जाओ कहीं दिलवर बुलाने मैं न आऊंगा
सिमट जाऊंगा अपने आप में ये ली शपथ मैंने
दुबारा प्रेम का दीपक जलाने मैं न आऊंगा ।।
शक्ति त्रिपाठी देव

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