Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

मुक्तक

उसकी नज़र में आज तो काबिल मैं बन गया।
लहरों कि वो रवानी तो साहिल मैं बन गया।
हट जाउँ रास्ते से मैं, इल्ज़ाम ये दिया
कहती है आज मुझको क़ातिल मैं बन गया।

अदम्य

1 Like · 227 Views
You may also like:
पिता
Anis Shah
हम जिधर जाते हैं
Dr fauzia Naseem shad
निज सुरक्षित भावी
AMRESH KUMAR VERMA
विवश मनुष्य
AMRESH KUMAR VERMA
✍️स्त्री : दोन बाजु✍️
'अशांत' शेखर
शासन वही करता है
gurudeenverma198
धारण कर सत् कोयल के गुण
Pt. Brajesh Kumar Nayak
छोड़ दिए संस्कार पिता के, कुर्सी के पीछे दौड़ रहे
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
💔💔...broken
Palak Shreya
रमेश छंद "नन्ही गौरैया"
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
“ मित्रताक अमिट छाप “
DrLakshman Jha Parimal
इस दर्द को यदि भूला दिया, तो शब्द कहाँ से...
Manisha Manjari
✍️✍️दोस्त✍️✍️
'अशांत' शेखर
“ प्रतिक्रिया ,समालोचना आ टिप्पणी “
DrLakshman Jha Parimal
गम तेरे थे।
Taj Mohammad
क्या मेरी कलाई सूनी रहेगी ?
Kumar Anu Ojha
बुंदेली हाइकु- (राजीव नामदेव राना लिधौरी)
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
अंतरराष्ट्रीय मित्रता पर दोहे
Ram Krishan Rastogi
मैं कुछ कहना चाहता हूं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
ढूढ़ा जाऊंगा
सिद्धार्थ गोरखपुरी
गर जा रहे तो जाकर इक बार देख लेना।
सत्य कुमार प्रेमी
चुप रहने में।
Taj Mohammad
# निनाद .....
Chinta netam " मन "
विभाजन की विभीषिका
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
हमारे पापा
पाण्डेय चिदानन्द
A solution:-happiness
Aditya Prakash
खुद को तुम पहचानों नारी ( भाग १)
Anamika Singh
नहीं हंसी का खेल
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
शेखर जी आपके लिए कुछ अल्फाज़।
Taj Mohammad
“ आत्ममंथन; मिथिला,मैथिली आ मैथिल “
DrLakshman Jha Parimal
Loading...