Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Mar 22, 2019 · 1 min read

मुक्तक

” कल तक थे पास अपने, अब दूर हो गए हैं,
रिश्तों में प्यार के गुल बेनूर हो गए हैं,
मुंह पर है बात मीठी, छुप-छुप के घात करते,
अपनो का अब तो ऐसे दस्तूर हो गए हैं”

119 Views
You may also like:
सोचा था जिसको मैंने
Dr fauzia Naseem shad
औकात में रहिए
Gaurav Dehariya साहित्य गौरव
जाने कहां वो दिन गए फसलें बहार के
Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI
बुंदेली हाइकु- (राजीव नामदेव राना लिधौरी)
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
ठाकरे को ठोकर
Rj Anand Prajapati
सागर
Vikas Sharma'Shivaaya'
पिता
Mamta Rani
" आपके दिल का अचार बनाना है ? "
DrLakshman Jha Parimal
*ध्यान में निराकार को पाना (भक्ति गीत)*
Ravi Prakash
बेसहारा हुए हैं।
Taj Mohammad
बारिश की बूंद....
"धानी" श्रद्धा
रसिया यूक्रेन युद्ध विभीषिका
Ram Krishan Rastogi
💐💐स्वरूपे कोलाहल: नैव💐💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
कर्म
Anamika Singh
सुख की कामना
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
बेरोज़गारों का कब आएगा वसंत
Anamika Singh
इंसानियत का एहसास भी
Dr fauzia Naseem shad
ए बदरी
Dhirendra Panchal
" ना रही पहले आली हवा "
Dr Meenu Poonia
लघुकथा: ऑनलाइन
Ravi Prakash
चुनिंदा अशआर
Dr fauzia Naseem shad
देखो हाथी राजा आए
VINOD KUMAR CHAUHAN
महफिल अफसूर्दा है।
Taj Mohammad
✍️अधमरी सोंच✍️
'अशांत' शेखर
"अरे ओ मानव"
Dr Meenu Poonia
अनुपम माँ का स्नेह
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
अब मै भी जीने लगी हूँ
Anamika Singh
💐उत्कर्ष💐
DR ARUN KUMAR SHASTRI
** शरारत **
Dr.Alpa Amin
भारतीय सभ्यता की दुर्लब प्राचीन विशेषताएं ।
Mani Kumar Kachi
Loading...