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Mar 20, 2019 · 1 min read

मुक्तक

” हाथ में पतवार ले, तूफ़ान से अब तू न डर,
तू अकेले ही कदम, आगे बढ़ा होके निडर,
बांध ले सर पे कफ़न, ये जंग खुशहाली की है
अंत तो होगा यक़ीनन, मौत से पहले न मर “

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