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Mar 17, 2019 · 1 min read

मुक्तक

” लेखनी, डरना नहीं तू मौत की ललकार से,
क्रान्ति लानी है तुझे अपनी नुकीली धार से,
जीत पायेंगे वो कैसे ज़िन्दगी की जंग को
हार बैठे हौसला जो इक ज़रा-सी हार से “

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