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Feb 25, 2019 · 1 min read

मुक्तक

हम मुतमइन हो नहीं सकते इस दौरे सियासत में
ख़िलाफ़त के लिए बोलना अभी बेहद जरूरी है !
उन्माद बेचने वालों की बड़ी-भीड़ लगी है प्यारे
उन के मुहों में इंसानी जज़्बात ठूसना बांकी है !
।।सिद्धार्थ।।

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