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May 26, 2018 · 1 min read

मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है

आपकी जुल्फें चाँदी-सीं रंग उन पर अति काला है ।
मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है ।

बुढापे की मस्त झुर्रीं, दे रहीं हैं आहट सँभलो ।
इसलिए मेकप करवाया ,उजाला ही उजाला है ।
मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है ।

तुम,अनुभव की शुभ ऑधी ,आपका दिल पूरणमासी
सदृश खिलते हुए पावन चंद्रमाओं की माला है ।
मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है ।

बुढापे में जवानी का सुहावन अभिनय है जीवन ।
मुस्कुराया-हँसा दिलवर, मिटा दिल का हर छाला है ।
मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है ।

आपकी जुल्फें चाँदी-सीं रंग उन पर अति काला है ।
मिलन-सुख की गजल-जैसा तुम्हें फैसन ने ढाला है ।
……………………………………………………

●-इस रचना को मेरी कृति “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह के द्वितीय संस्करण के अनुसार परिष्कृत किया गया है।

●”जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह का द्वितीय संस्करण अमेजोन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।

पं बृजेश कुमार नायक

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