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11 Oct 2021 · 1 min read

🙏मॉं कात्यायनी🙏

“मॉं कात्यायनी”
*****🙏*****

जय जय जगकल्याणी , जय जय नारायणी;
तू है , नवदुर्गा की षष्ठी रूप मां ‘कात्यायनी’;
महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया तूने, मां;
भगवती रूप धारण करके आई थी, तू ‘उमा’;
ब्रह्मा, विष्णु,महेश ने तुझे अपनी शक्ति दिए;
तूने उनके इच्छित, सारे ही कार्य संपन्न किए;
हे ईश्वरी, तू ही गौरी, चंडिका और भवानी है;
मां तू,जग की अधिष्ठात्री देवी ‘कात्यायनी’ है;
तेरी उपासना से;अर्थ,धर्म,काम व मोक्ष मिले;
हे भव्या, हे भवानी; तू अमोघफल दायिनी है;
मां तुम हो चार भुजाधारी,आदिशक्ति है रूप
भास्वर , दीप्त और चमकीला है तेरा स्वरूप;
हे मां ‘भद्रकाली’, लालरंग सदा तुझे प्यारी है;
माता तुम करती , सदा ही सिंह की सवारी है;
‘माता’ तू ही, अभयमुद्रा और वरमुद्रा धारी है;
तेरे तलवार व कमलपुष्प दानवों पर, भारी है;
हे मां ब्रह्मावादिनी, तू ही सर्वदानवघातिनी है;
जग की रक्षा करनेवाली मां तू जगधारिणी है;
‘महिषासुरमर्दिनी’, तूने महिषासुर वध किया;
मां तूने ही दानव मुक्त यह सम्पूर्ण जग किया;
जो भक्त करे मन से , तेरे इस रूप का पूजन;
सदाचारी बने, सदा सफल हो उसका जीवन;
हे मां परमेश्वरी, हम सब बालक हैं तेरे नादान;
सदा प्रार्थना करे तेरी, माता तू देना ऐसा ज्ञान;
हर मुख पर सदा , ‘हे माता’ तेरी ही पुकार हो;
पूरा जग, ‘जय माता दी’ ‘जय माता दी’ बोले;
हर जनमानस का , हर पल यही ‘संस्कार’ हो।
*****************🙏****************

स्वरचित सह मौलिक
…….✍️पंकज कर्ण
……. कटिहार।।
तिथि: ११/१०/२०२१

Language: Hindi
5 Likes · 2 Comments · 802 Views
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