Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
May 8, 2022 · 1 min read

माँ

डा . अरुण कुमार शास्त्री
एक अबोध बालक – अरुण अतृप्त

माँ

माँ है अनमोल
माँ है बे मोल
कदर कब जानी हमने

गुजरा वक्त याद
दिलाता – सन्तति
को है फिर ये लजाता

फिर ये कोई क्या
मुड़ के आता
लेकिन कोई
कहाँ है भूल पाता

माँ के ऋण
को कैसे चुकाता
सब ऋण भूले
एक न भूला
मय्या मय्या कह के बुलाता

सुख में दुख में
तु ही हिम्मत
पल पल लिखती
मेरी किस्मत

तेरे दूध से बढ्ता जाता
रक्त मांस अस्थी औ मज्जा
का था पिण्ड कभी जो कहाता

माँ है अनमोल
माँ है बे मोल
कदर कब जानी हमने

1 Like · 1 Comment · 85 Views
You may also like:
प्रेयसी
Dr. Sunita Singh
हे तात ! कहा तुम चले गए...
मनोज कर्ण
सच
अंजनीत निज्जर
वैवाहिक वर्षगांठ मुक्तक
अभिनव मिश्र अदम्य
धूप में साया।
Taj Mohammad
अग्रवाल धर्मशाला में संगीतमय श्री रामकथा
Ravi Prakash
राष्ट्रवाद का रंग
मनोज कर्ण
पिता:सम्पूर्ण ब्रह्मांड
Jyoti Khari
मेरे पापा
ओनिका सेतिया 'अनु '
दो दिलों का मेल है ये
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
लता मंगेशकर
AMRESH KUMAR VERMA
अल्फाज़ ए ताज भाग-3
Taj Mohammad
न थी ।
Rj Anand Prajapati
✍️✍️दोस्त✍️✍️
"अशांत" शेखर
बचपन की यादें
AMRESH KUMAR VERMA
जिंदगी को खामोशी से गुज़ारा है।
Taj Mohammad
बदला
शिव प्रताप लोधी
बस तुम को चाहते हैं।
Taj Mohammad
"मैं तुम्हारा रहा"
Lohit Tamta
इन्तजार किया करतें हैं
शिव प्रताप लोधी
योग करो।
Vijaykumar Gundal
"एक नई सुबह आयेगी"
पंकज कुमार "कर्ण"
💐 देह दलन 💐
DR ARUN KUMAR SHASTRI
विवश मनुष्य
AMRESH KUMAR VERMA
प्रार्थना(कविता)
श्रीहर्ष आचार्य
दुनिया पहचाने हमें जाने के बाद...
Dr. Alpa H. Amin
आज अब्र भी कबसे बरस रहा है।
Taj Mohammad
नोटबंदी ने खुश कर दिया
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
हवा का हुक़्म / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
संडे की व्यथा
ज्ञानीचोर ज्ञानीचोर
Loading...