Sep 10, 2016 · 2 min read

महाकवि तुलसी-महिमा

दन्त पंक्ति पट खोल, मुख तेहिं बोला राम जब|
सुत उपजा अनमोल, हुलसी हुलसी, जग चकित|| (सोरठा)

राजापुर शुभ रत्न समाना| उपजा जहँ तुलसी विद्वाना||
छंद शिरोमणि बाबा तुलसी| पिता आतमा माता हुलसी|१|
शुक्ल सप्तमी श्रावण मासा| तुलसी जन्मे बाँधी आसा||
पंदह सौ चौवन गंभीरा| कालिंदी तट धरा शरीरा|२|
गुरु नरहर्यानन्द सुहाये| रत्नावलि सन्मार्ग पठाये||
रामनाम महिमा जपि जानी| कर्मवीर तुलसी विज्ञानी|३|
परम भक्त कपि सज्जन चीन्हा| तब हनुमंत दरस हँसि दीन्हा||
राम दरस सिय संग करावा| चीन्हे नहिं तुलसी पछितावा|४|
मौनि अमावस पुनहिं दिखाये| बालरूप लखि अति सुख पाये||
भइ शिवकृपा मनहिं अकुलाये| ‘रामचरितमानस’ रचि पाये|५|

सुरसति हनुमत प्रेरना, हर्षित उमा महेश|
रामचरितमानस रचैं, सादर सुमिरि गणेश|| (दोहा)

नीतिपरक सत्कर्म प्रधाना| जन-कल्याणी मानस जाना||
समाधान सब ग्रन्थ करावै| जो नहिं बाँचै सो पछितावै|६|
‘कवितावलि’ ‘गीतावलि’ सोहे| ‘हनुमत-चालीसा’ मनमोहे||
‘बरवै-रामायण’ मनभावै| ‘रामलला नहछू’ दुलरावै|७|
विनय पत्रिका राम सुहाई| तुलसी निर्भय लखि प्रभुताई||
अवधी के सम्राट कहावैं| तुलसी जन-जन के मन भावैं|८|
श्रावण शुक्ला सप्तमि भायी | तुलसि जन्म निर्वाण प्रदायी||
सोलह सौ असि सम्वत द्वारे| गंग-तीर साकेत सिधारे|९|
जग में नहिं कवि तुलसि समाना| रचे ग्रन्थ अति पावन नाना||
छंद सुमन शुभ निज मन भाये| ‘अम्बरीष’ अर्चन करि ध्याये|१०| (चौपाई)

हनुमत किरपा ते गए, प्रभु चरनन कै पास|
वाल्मीकि अवतार हैं, त्यागी तुलसीदास|| (दोहा)

धरि रामछवि हिय नित्य तुलसी, राम महिमा गावहीं,
प्रभु भक्तिरसमय वृष्टि भू सुर, आमजन सुख पावहीं.
लखि छंदमय शुभ ग्रन्थ ‘मानस’, शिव मुदित आशिष हिये,
शुभ सृजन सत्य सनेह सुन्दर, ज्ञान सागर जानिये.. (हरिगीतिका)

रामभक्त तुलसी सहज, अमर सृजन प्रिय नाम|
कोटि-कोटि वंदन नमन, हिय ते नित्य प्रणाम|| (दोहा)

–इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

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