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21 Jul 2022 · 1 min read

मर्यादा का चीर / (नवगीत)

घोड़ा चलता
चाल दुलत्ती
औंधे पड़े वज़ीर ।

राजा के भी
कर्म-धर्म की
धुँधली है तस्वीर ।

जल संकट की
व्यापकता से
विचलित होते ऊँट ।
पँक्ति बनाकर
चली चींटियाँ
हाथी करे सलूट ।
अपनी-अपनी
शह-मातों का
लेखा – जोखा
लगा-लगाकर,
चला रहे, ये
खेल अनोखा ।

कर्म-युद्ध को
पीठ दिखाकर
खींचें भाग्य लकीर ।

जोर लगाते
पैदल सैनिक
करते जमकर मार ।
फिर भी इनके
हाथ लगी है
अब तक केवल हार ।
चल निकले हैं
खोटे सिक्के
बाजारों में ।
चुने गए हैं
चोखे सिक्के
दीवारों में ।

पदलोलुपता
खींच रही है
मर्यादा का चीर ।
०००
— ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
छिरारी(रहली),सागर
मध्यप्रदेश ।

Language: Hindi
Tag: गीत
11 Likes · 20 Comments · 281 Views
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