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Jan 24, 2017 · 1 min read

मन

कभी सोचो कि
पल दो पल जियें
खुद के लिये यारो
कभी सोचो कि
कोई हो जहाँ
न हो कोई नज़र यारो
कभी सोचो कि
सोचो से भी
मिल जाये छुटकारा
कभी सोचो कि
न हो धूप हवा
और अंधेरा यारो
हंसो मत
ऐसी सोचो पर
है मुमकिन
ये मेरा मन है
जहां न कोई छुअन
अहसास न
बस मेरा ही
मन है।

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