Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Jun 4, 2022 · 1 min read

मन सीख न पाया

कितने जख्म मिले है अब तक,
पर मन सहना सीख न पाया ।
चोट लगी जब भी अन्तस में,
झर-झर ये आंसू झर आया ।
रे मन पगले ! अब तो सीख
जीवन में अति कुटिल कुठार ।
जिनको है सर्वस्व समर्पण,
वो ही करते मन पर वार ।
कब तक रोयेगा तू ऐसे
नहीं किसी को है परवाह |
मूल्यवान न अश्रु तेरे हैं
सबको निज अर्थों की चाह ।
जो बिन मांगे अनमोल दिया
कोई मूल्य समझ न पायेगा ।
तू भूलेगा निज को यदि
ये जग तुझको बिसरायेगा ।

4 Likes · 6 Comments · 171 Views
You may also like:
बहुत अच्छे लगते ( गीतिका )
Dr. Sunita Singh
✍️साँसों को हवाँ कर दे✍️
'अशांत' शेखर
दरारें
Gaurav Dehariya साहित्य गौरव
लफ़्ज़ों में पिरो लेते हैं
Dr fauzia Naseem shad
माँ
Dr Archana Gupta
आमाल।
Taj Mohammad
ख्वाब
Harshvardhan "आवारा"
एक शहीद की महबूबा
ओनिका सेतिया 'अनु '
हवा का हुक़्म / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बाबूजी! आती याद
श्री रमण 'श्रीपद्'
भगवान की तलाश में इंसान
Ram Krishan Rastogi
अधर मौन थे, मौन मुखर था...
डॉ.सीमा अग्रवाल
✍️"बारिश भी अक्सर भुख छीन लेती है"✍️
'अशांत' शेखर
✍️KITCHEN✍️
'अशांत' शेखर
*योग (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
पेशकश पर
Dr fauzia Naseem shad
ऐ वतन!
Anamika Singh
खामों खां
Taj Mohammad
उमीद-ए-फ़स्ल का होना है ख़ून लानत है
Anis Shah
" सहमी कविता "
DrLakshman Jha Parimal
*सर्वोत्तम शाकाहार है (गीत)*
Ravi Prakash
कुछ यादें जीवन के
Anamika Singh
बेपनाह रूहे मोहब्बत।
Taj Mohammad
✍️"सूरज"और "पिता"✍️
'अशांत' शेखर
सूरज का ताप
सतीश मिश्र "अचूक"
खुद को कभी न बदले
Dr fauzia Naseem shad
'बदला जग मौसम भी बदला'
Godambari Negi
तीर ए नज़र से।
Taj Mohammad
कारगिल फतह का २३वां वर्ष
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
इच्छाओं का घर
Anamika Singh
Loading...