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3 Jun 2022 · 1 min read

मन पीर कैसे सहूँ

मन पीर कैसे सहूँ ,तुम बिन कैसे रहूँ
अब और क्या कहूँ ,खुद कुछ जान लो ।

तुम्हीं लगते जीवन ,तुम्हीं मेरे प्राणधन
माना तुमको सजन ,अब पहचान लो ।

प्रतीक्षारत है आँख ,उगते हैं नित पाँख
करो न यूँ स्वप्न राख ,अपना तो मान लो ।

चतुर तुम्हारा ज्ञान ,मुझको यही है भान
दोगी प्यार प्रतिदान ,हृदय में ठान लो ।

डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’
2/6/2022

2 Likes · 2 Comments · 157 Views
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