Jan 12, 2021 · 1 min read

मन – पंछी

दिन सूना
भीगी रात
बयार निगोड़ी
करे आघात
मन का पंछी
पंचम कैसे गाए
सिले अधर
पथराई बात
देखो न
फिर होने लगी
बिन जलधर
कैसी बरसात
तृण भीगे
भीगे पात
कैसी निष्ठुर
मीठी रात

अशोक सोनी
भिलाई ।

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