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29 Jul 2022 · 1 min read

मन की पीड़ा

मन की पीड़ा
मन के भीतर
मूक सी है
कैसी जीवन में
जीवन की
भूख सी है
कोमल मन में,
मन की पीड़ा
भाव समाहित
ह्रदय में खिली
कोई धूप सी है
रिश्तों में विफलता
संबंधों की
चूक सी है ।

डाॅ फौज़िया नसीम शाद

Language: Hindi
Tag: कविता
10 Likes · 172 Views
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