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Sep 26, 2017 · 1 min read

मदिरा नैनों की ….

बरखा अम्बर की हल्की हल्की है l
….मदिरा नैनों की नैन से छलकी है l
……..मधुपल सिमटे हैं सांझ की बेला में –
………….याद पिया की आँसू बन ढलकी है l

सुशील सरना

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