Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Jun 6, 2021 · 1 min read

भू से मिलकर नवजीवन की गाथाएं रचती हैं।

भू से मिलकर नवजीवन की गाथाएं रचती हैं।
बूँदे झरतीं मेघों से बन धाराएं बहती हैं।

इन ऊंचे पर्वत का जैसे पति ये सावन ही हो।
कभी तो लगता ऐसे जैसे मांग सुहागन की हो।
दूर से चमके चम चम चम चम चमकीली धाराएं।
पर्वत की चोटी से लगता चांदी बहती आये।
सभी धातुओं सभी द्रव्य से कीमती ये होती हैं।
भू से मिलकर नवजीवन —————————–।

सोख के इनको अपने उर में संचित कर लेती हैं।
जितना हो आँचल में अपने अर्जित कर लेती हैं।
सरस धरा होती जाती है दूर शुष्कता भागे।
फूली फली खूब है देखो भाग्य धरा के जागे।
नन्ही इन बूँदों से कितनी आशाएं फलती हैं।
भू से मिलकर नवजीवन——————————।

हुई चंचला सरिताएं सब इनके हैं क्या कहने।
मोती भर भर ले जातीं सागर साजन को देने।
वेग है इतना तट बन्धो को तोड़के बहती जाएं।
धैर्य का परिचय भी देती हैं बन्दी जब बन जाएं।
शांत सयानी बनकर पोखर तालों में रहती हैं।
भू से मिलकर नवजीवन——————————-।

वन , झाली , महुवारी लगता आठो याम हैं जागे।
पत्तों से बूंदे गिरतीं करती टप टप आवाजें।
डैने फड़ फड़ करके पँछी जल मोती बिखराते।
मीन तैरती खुश हो मस्ती में दादुर टर्राते।
स्वर संगम कर देती बूंदे जहां कहीँ गिरती हैं।
भू से मिलकर नवजीवन ———————————।

10 Likes · 3 Comments · 259 Views
You may also like:
*बुरे फँसे कवयित्री पत्नी पाकर (हास्य व्यंग्य)*
Ravi Prakash
भगवान सा इंसान को दिल में सजा के देख।
सत्य कुमार प्रेमी
तुम बहुत खूबसूरत हो
Anamika Singh
$दोहे- सुबह की सैर पर
आर.एस. 'प्रीतम'
ख्वाब को बाँध दो
Anamika Singh
उस निरोगी का रोग
gurudeenverma198
आपके जाने के बाद
pradeep nagarwal
अकेलापन
AMRESH KUMAR VERMA
है रौशन बड़ी।
Taj Mohammad
पिता
पूनम झा 'प्रथमा'
हासिल ना हुआ।
Taj Mohammad
पिता
Santoshi devi
आंचल में मां के जिंदगी महफूज होती है
VINOD KUMAR CHAUHAN
ख्वाब
Swami Ganganiya
कब तुम?
Pradyumna
धारणाएँ टूट कर बिखर जाती हैं।
Manisha Manjari
बरसात
Ashwani Kumar Jaiswal
खड़े सभी इक साथ
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
ईद
Khushboo Khatoon
हैं सितारे खूब, सूरज दूसरा उगता नहीं।
सत्य कुमार प्रेमी
गँवईयत अच्छी लगी
सिद्धार्थ गोरखपुरी
दिल का यह
Dr fauzia Naseem shad
रक्षा बंधन :दोहे
Sushila Joshi
I feel h
Swami Ganganiya
बेपरवाह बचपन है।
Taj Mohammad
गुरु तेग बहादुर जी
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
गजल क्या लिखूँ कोई तराना नहीं है
VINOD KUMAR CHAUHAN
तुम चली गई
Dr.Priya Soni Khare
इन्तजार किया करतें हैं
शिव प्रताप लोधी
वासना और करुणा
मनोज कर्ण
Loading...