Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Jun 2022 · 1 min read

भरमा रहा है मुझको तेरे हुस्न का बादल।

ग़ज़ल

भरमा रहा है मुझको तेरे हुस्न का बादल।
रखता है कैद करके तेरे जुल्फ का बादल।

करता हूं इन्तेजार तिरा हुस्न की मलिका,
चाहूंगा एक पल को मिले वस्ल का बादल।

इंसान की तरह ये कई रूप के होते,
देखा नहीं कभी भी तेरी शक्ल का बादल।

पल में बहा दे खून की बेबाक ही नदियां,
देखा नहीं इंसान की भी नस्ल का बादल।

गंगो जमीन की गोद में महफूज रहें सब।
मौला करम हो सिर पे रहें अम्न का बादल।

……..✍️ सत्य कुमार प्रेमी
स्वरचित और मौलिक

48 Views
You may also like:
ज़िंदगी से सवाल
Dr fauzia Naseem shad
फीका त्यौहार
पाण्डेय चिदानन्द
पहाड़ों की रानी शिमला
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
दर्द अपना है तो
Dr fauzia Naseem shad
रोटी संग मरते देखा
शेख़ जाफ़र खान
संकुचित हूं स्वयं में
Dr fauzia Naseem shad
जितनी मीठी ज़ुबान रक्खेंगे
Dr fauzia Naseem shad
उसे देख खिल जातीं कलियांँ
श्री रमण 'श्रीपद्'
ठोकरों ने समझाया
Anamika Singh
कोई मंझधार में पड़ा हैं
VINOD KUMAR CHAUHAN
सफ़र में रहता हूं
Shivkumar Bilagrami
तुम मेरा दिल
Dr fauzia Naseem shad
पिता
Pt. Brajesh Kumar Nayak
एसजेवीएन - बढ़ते कदम
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
कहीं पे तो होगा नियंत्रण !
Ajit Kumar "Karn"
आप से ज़िंदगी
Dr fauzia Naseem shad
शून्य से शून्य तक
Dr fauzia Naseem shad
✍️महानता✍️
'अशांत' शेखर
ख़्वाहिशें बे'लिबास थी
Dr fauzia Naseem shad
बदलते हुए लोग
kausikigupta315
सूरज से मनुहार (ग्रीष्म-गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बिछड़ कर किसने
Dr fauzia Naseem shad
"अष्टांग योग"
पंकज कुमार कर्ण
सिद्धार्थ से वह 'बुद्ध' बने...
Buddha Prakash
अपना ख़्याल
Dr fauzia Naseem shad
पिता:सम्पूर्ण ब्रह्मांड
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
पिताजी
विनोद शर्मा सागर
गीत
शेख़ जाफ़र खान
✍️इतने महान नही ✍️
Vaishnavi Gupta
बुआ आई
राजेश 'ललित'
Loading...