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— बोल न कड़वे बोल —

आया धरती पर तू प्राणी
बोल न कड़वे बोल रे
जग को कर ले अपना प्राणी
बोल तू मीठे बोल रे !!

अपना पराया क्या होता है
यह अपनी जुबान से तोल रे
मीठा बन कर सफ़र तू
बन जा तू सिरमौर रे !!

कौन कहे तुझे तू बुरा है
यह तो सब अपने हाथ रे
मत भटका अपने मन को
मिल कर चल सब ओर रे !!

आशा है तो निराशा न कर
चल सद कर्म, की और रे
कर जा जग में काम अनमोल
चारों तरफ रहे तेरा शोर रे !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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