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Jun 16, 2021 · 1 min read

बेवफ़ाई

जब तूने मुझे तोड़ा था,
कई महीने जला दिए थे मैंने संभलते- संभलते ।

जिस सच को मेरी आँखों ने देखा था,
रूह काँप गई थी मेरी उसी सच को अपनाते-अपनाते।

जब तू इस वास्तविकता को लिख रही थी,
दिन गुज़रते थे मेरे एक सपने में मुस्कराते-मुस्कराते।

जिस मूरत पे किसी की आँख तक न उठने दी थी,
हार सा गया था मैं उसे ही अपने मन से हटाते-हटाते ।

– सिद्धांत शर्मा

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