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22 May 2024 · 2 min read

बेलन टांग दे!

बेलन टांग दे!

सुबह सुबह देख रहे थे तेज आवाज़ की खबरें,
न्यूज़ चँनलो की कतार से।
सीढ़ी से श्रीमती दौड़ती आयी,
तेज रफ़्तार से।।

रसोई में घुसते घुसते,
बोल रही कपड़ो को छत पर सूखा दिया।
अब रोटी बना रही,
वैसे आज कोई त्यौहार है क्या।।

तेज आवाज के बीच ,
मैंने बोला वैलेंटाइन डे।
गुस्से से रसोई से बोली,
क्यों बेलन टांग दे।।

बेलन टांग दूंगी,
तो रोटी कैसे बनेगी।
बेटी क्या स्कूल में,
भूखी रहेगी।।

उसकी बात सुन,
दिमाग की घंटी थोड़ी थमी ।
फिर टीवी बंद कर बोला,
आज है बसंत पंचमी।।

रसोई में जाकर पूछा,
क्या है खाने में आज खास।
वो मेरी तरफ देखकर बोली,
ये कैसी है बकवास।।

वही तो है,
जो हम रोज खाते है।
मेन्यू ऐसे पूछ रहे,
जैसे हम रेस्टोरेंट चलाते है।।

मैंने कहा देवी,
थोड़ा दो आज सरस्वती को सम्मान।
रुक तो जाओ थोड़ा,
दो अपने शब्दों को विराम।।

आज बसंत पंचमी भी है,
और साथ है वेलेनटाइन डे।
आज थोड़ा घूमने जाने के लिए,
भी थोड़ा टाइम दे।।

बेटी को स्कूल भेज,
मंदिर को गए।
वहां से निकले ,
फूलो की दूकान पर रुक गए ।।

प्रेम भरे लहजे में ,
दिया मैंने उसको गुलदस्ता।
उसने भी प्रेम से लेते हुए इशारे में ,
पूछा की महंगा या सस्ता ।।

कीमत सुनकर
बोली बड़े गुस्से से।
इसमें तो सब्जी आ जाती,
दो दिन की अच्छे से।।

मन को मसोस,
मैंने स्कूटर को रेस दिया।
भीड़ भरी गलियों में,
लॉन्ग ड्राइव के लिए मोड़ दिया।।

रुको रुको रुको,
वो जोर से बोली।
साड़ी की दुकान थी,
जिसने मेरी राहें रोकी।।

सुबह से बड़ा,
वेलेनटाइन कर रहे।
अब चलो साड़ी दिला दो महंगी सी,
मैंने भी चुटकी लेते कहा,
इसमें तो महीने भर की सब्जी मिल जाएगी अच्छी सी।

पर मन ने मेरे सोचा,
की दिला देते है।
पॉकेट को समझा के
कुछ ख़ुशी जीवन में भर देते है।।

वहाँ से निकलआगे ही चले थे,
कि एक खुशबु ने मुझे टोका।
सर घुमा के देखा,
तो गर्म कचोरी ने मेरा स्कूटर रोका ।।

जैसे ही कदम बड़े,
लेने स्वाद का मजा खुमारी से।
श्रीमती बोल पड़ी खालो,
पर बाद में बोलना की परेशां हो,
कोलेस्ट्रॉल की बीमारी से।।

फिर भी थोड़ा खा पीकर,
घर को आये।
सोचा थक गए है,
थोड़ा आराम किया जाये।।

शाम को सोचा,
कितना पैसा है अभी अकाउंट में।
बच्चो की फीस, रेंट, इन्कमटैक्स भी है देना,
इस महीने में काउंट में।।

यही है प्रेम भरा जीवन,
एक आम बन्दे का।
कभी श्रीमती सुने की बेलन टांग दे,
तो कभी जीवन हमारा बैंक बैलेंस टांग दे।।

डॉ. महेश कुमावत 14 फ़रवरी 2024

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