Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Jul 2016 · 1 min read

बेबस बदन देखा

हमने यहीं पर ये चलन देखा
हर गैर में इक अपनापन देखा

देखी नुमाइश जिस्म की फिरभी
जूतों से नर का आकलन देखा

हर फूल ने खुश्बू गजब पायी
महका हुआ सारा चमन देखा

लिक्खा मनाही था मगर हमने
हर फूल छूकर आदतन देखा

उस दम ठगे से रह गए हम यूँ
फूलों को भँवरों में मगन देखा

होती है रुपियों से खनक कैसे
हमने भी रुक-रुक के वो फन देखा

रोशन चिरागों के तले देखे
गलता हुआ बेबस बदन देखा

~ अशोक कुमार रक्ताले

1 Like · 4 Comments · 355 Views
You may also like:
भय
Shyam Sundar Subramanian
जीतकर ही मानेंगे
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
पहले प्यार में
श्री रमण 'श्रीपद्'
बरसात
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
दोगले मित्र
अमरेश मिश्र 'सरल'
कांटों पर उगना सीखो
VINOD KUMAR CHAUHAN
समझना तुझे है अगर जिंदगी को।
सत्य कुमार प्रेमी
इक्यावन उत्कृष्ट ग़ज़लें
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
ये बारिश के मोती
Kaur Surinder
भूल जाने की क्या ज़रूरत थी
Dr fauzia Naseem shad
💐💐प्रेम की राह पर-63💐💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
ना पूंछ तू हिम्मत।
Taj Mohammad
विनती
Anamika Singh
✍️बुरी हु मैं ✍️
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
फूलों से।
Anil Mishra Prahari
फादर्स डे पर विशेष पिरामिड कविता
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
प्रलय गीत
मनोज कर्ण
" फ़ोटो "
Dr Meenu Poonia
जब 'बुद्ध' कोई नहीं बनता।
Buddha Prakash
वीरों को युद्ध आह्वान.....
Aditya Prakash
याद आते हैं
Dr. Sunita Singh
✍️पत्थर✍️
'अशांत' शेखर
हिंदी से प्यार करो
Pt. Brajesh Kumar Nayak
तेरा पापा... अपने वतन में
Dr. Pratibha Mahi
" दृष्टिकोण "
DrLakshman Jha Parimal
*कविवर रमेश कुमार जैन की ताजा कविता को सुनने का...
Ravi Prakash
"शब्दकोश में शब्द नहीं हैं, इसका वर्णन रहने दो"
Kumar Akhilesh
एक उदास शाम को
Shekhar Chandra Mitra
जंगल के राजा
Abhishek Pandey Abhi
तेरे ख्वाब सदा ही सजाते थे
अनूप अंबर
Loading...