Sep 23, 2016 · 1 min read

बेताब कलम

कलम भी चलने को बेताब हे . और लब्ज होटो से फिसलने को ,
अब तो कागज़ का पन्ना भी थम सा गया हे कलम की नोक को चूमने को
अल्फाज़ मेरे चारो और बिखरे पड़े हे . और पड रहा हु किसी मशहूर कवी की कविताओ को…

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