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बेउम्मीद मुसाफ़िर

ज़लज़ला न कहो मुझे…
अभी आग की जरूरत हैं!
शायर न कहो मुझे….
अभी शब्दों की जरूरत हैं!
मै इश्क की इस दुनिया का …
बेउमीद एक मुसाफ़िर हूँ!
देवदास न कहो मुझे…
अभी ग़मो की जरूरत हैं!!!
–सीरवी प्रकाश पंवार

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