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23 Jan 2024 · 1 min read

बुला लो

जन्म जन्म की मैं हूँ प्यासी
सदा रहूँ दर्शन अभिलाषी

अपने स्नेह से किया सवेरा
जैसे मिटा हो जन्मों का फेरा

मन मन्दिर में किरण जगाई
जीवन जीने की आस जगाई

ज्ञात मुझे मैं ही अपराधी
क्षमा करो सकल गुणराशी

घट घट स्वामी अन्तर्यामी
मैं मानव रहा खल कामी

वरद हस्त आशीष छाव में
योग्य बनाओ निकट पाँव में

अब तो नाथ मुझे बुला लो
श्री चरणों में मुझे बिठा लो

Language: Hindi
10 Likes · 88 Views
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