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Jun 11, 2021 · 1 min read

बुझा दो प्यास ————- मुक्तक

********मुक्तक*******
बुझा दो प्यास जन जन की,तुम्हीं से आस जीवन की।
ओ बदरा घीर के आ जाओ, तपन मिट जाए हर तन की।।
निगाहें तुमपे है अटकी,भरोगे हर घट की मटकी।
बहेगी सांसों की धारा, चाहत सबकी धड़कन की।।
राजेश व्यास अनुनय

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