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“बीता पल”

वो पल ,जो था कल ,
कितना प्यारा था,
कितना न्यारा था|
बीत गया जो पल,
आये ना वो कल ,
सोयी थी जब मैं ,
बन के सपना अँखियों में ,
आया वो पल ,
कुछ धुंधलाया ,कुछ गहराया ,
कितना न्यारा था,
कितना न्यारा था|
बैठी – बैठी सोचूँ मैं ,
पकड़ू मैं उस पल को,
यादों के झुरमुट के पीछे ,
जा के छुपा वो पल,
सोचूँ बन के तितली उड़ू,
यादों के पीछे उड़ती फिरूँ,
आज के जाल में फँसी,
हाथ ना आया बीता पल|
…निधि…

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