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Jul 5, 2022 · 1 min read

बिख़रे वजूद की

बिखरे वजूद की जब
समेटी जो किरचियां ।
नींदों से ख़्वाब को फिर
मिलने नहीं दिया ।।

डाॅ फौज़िया नसीम शाद

5 Likes · 36 Views
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