Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Nov 5, 2016 · 1 min read

बात

बात
✍✍✍✍

बात
जो कहनी है
लबों तक आती है
कुछ देर ठहर
देख तुझे
गुम हो जाती है
संकेत कुछ
सही कहो या गलत
अपने से खो
जाने के या
दिल में किसी के
उतर जाने के
लगते है

बात
तुम्हारी सहज
और सही
लगती है
क्योंकि तुम
भुक्तभोगी नहीं हो
इसलिये सुन
बात मेरी
मुस्करा कर
रह जाते हो

डॉ मधु त्रिवेदी

72 Likes · 180 Views
You may also like:
✍️थोड़ी मजाकियां✍️
"अशांत" शेखर
इंसाफ हो गया है।
Taj Mohammad
दीवार में दरार
VINOD KUMAR CHAUHAN
*प्रखर राष्ट्रवादी श्री रामरूप गुप्त*
Ravi Prakash
मौत ने कुछ बिगाड़ा नहीं
अरशद रसूल /Arshad Rasool
क्या करें हम भुला नहीं पाते तुम्हे
VINOD KUMAR CHAUHAN
उस रब का शुक्र🙏
Anjana Jain
पिता
Deepali Kalra
और मैं .....
AJAY PRASAD
पिता
Vandana Namdev
सेहरा गीत परंपरा
Ravi Prakash
जब भी तन्हाईयों में
Dr fauzia Naseem shad
रामे क बरखा ह रामे क छाता
Dhirendra Panchal
पिता की अभिलाषा
मनोज कर्ण
मनोमंथन
Dr. Alpa H. Amin
An abeyance
Aditya Prakash
जातिगत जनगणना से कौन डर रहा है ?
Deepak Kohli
युद्ध सिर्फ प्रश्न खड़ा करता है [भाग६]
Anamika Singh
भगवान परशुराम
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
O brave soldiers.
Taj Mohammad
मेरी नेकियां।
Taj Mohammad
बारहमासी समस्या
Aditya Prakash
डॉक्टर (मुक्तक)
Ravi Prakash
नव सूर्योदय
AMRESH KUMAR VERMA
“ गंगा ” का सन्देश
DESH RAJ
If we could be together again...
Abhineet Mittal
Kavita Nahi hun mai
Shyam Pandey
रसीला आम
Buddha Prakash
मेरी बेटी
Anamika Singh
✍️क्या क्या पढ़ा है आपने ?✍️
"अशांत" शेखर
Loading...