Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Apr 2022 · 1 min read

बस एक निवाला अपने हिस्से का खिला कर तो देखो।

वह पाषाण नहीं उनके अंदर भी दिल है ,
उनके दिलों में भी गम है, आँखें उनकी भी नम है,
देखो जरा वह पिता हैं, देखो जरा,
वह इंसान के रूप में भगवान ही तो हैं।

बचपन में तुम्हारे जरा सी रोने से,
जिनका सीना छलनी छलनी हो जाता था,
आज उन्हें रोने की हजार वजह दे दिया करते हो।

तुम्हें काबिल बनाने के खातिर ,पिता दिन रात मेहनत करते थें, तुम्हारी हर एक ख्वाहिशें पूरी करने के खातिर,
ना जाने वह कितनी रातें बिना,
आराम किये गुजार दिया करते थे।

बचपन में कहा करते थे बड़ा होकर कमाकर खिलाऊंगा,
बस एक बार ,बस एक बार इन बातों को ,
दोहरा कर तो देखो।

बेशक मत उठाना जिम्मेदारियां उनकी,
बेशक मत उठाना जिम्मेदारियां उनकी,
उन्हें किस चीज की जरूरत है,
यह पूछ कर तो देखो।

उनके हिस्से का भी खाकर पले बड़े हो ,
बस एक निवाला ,बस एक निवाला ,
अपने हिस्से का खिलाकर तो देखो।

वह कांटें नहीं जो चुभने लगे हैं,
वह कांटे नहीं जो चुभने लगे हैं ,
आज भी फूलों की पंखुड़ियों की भाँति,
तुम्हारे पथ पर पड़े हैं।

देखो जरा वह पिता हैं, देखो जरा,
वह इंसान के रूप में भगवान ही तो हैं।

Language: Hindi
Tag: कविता
9 Likes · 14 Comments · 337 Views
You may also like:
नख-शिख हाइकु
Ashwani Kumar Jaiswal
आइए डिजिटल उपवास की ओर बढ़ते हैं!
Deepak Kohli
भारतीय संस्कृति और उसके प्रचार-प्रसार की आवश्यकता
पंकज कुमार शर्मा 'प्रखर'
ज़रा सी बात पर ghazal by Vinit Singh Shayar
Vinit kumar
पर्यावरण बचा लो,कर लो बृक्षों की निगरानी अब
Pt. Brajesh Kumar Nayak
भारत की स्वतंत्रता का इतिहास
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
#हमसफ़र
Seema 'Tu hai na'
संघर्ष
Sushil chauhan
*महाराजा अग्रसेन ( कहानी )*
Ravi Prakash
जेब में सरकार लिए फिरते हैं
VINOD KUMAR CHAUHAN
Apology
Mahesh Ojha
प्रेम कथा
Shiva Awasthi
"कभी मेरा ज़िक्र छिड़े"
Lohit Tamta
भोले भंडारी
DR ARUN KUMAR SHASTRI
बिंत-ए-हव्वा के नाम
Shekhar Chandra Mitra
पलटू राम
AJAY AMITABH SUMAN
अन्नदाता किसान कैसे हो
नूरफातिमा खातून नूरी
पत्ते
Saraswati Bajpai
बदलते हुए लोग
kausikigupta315
कभी तो तुम मिलने आया करो
Ram Krishan Rastogi
आग़ाज़
Shyam Sundar Subramanian
मुहब्बत कभी तमाम ना होती है।
Taj Mohammad
भोजन
Vikas Sharma'Shivaaya'
सावन आया आई बहार
Anamika Singh
ध्यान
विशाल शुक्ल
✍️✍️जिंदगी✍️✍️
'अशांत' शेखर
दर्द को मायूस करना चाहता हूँ
Sanjay Narayan
नेता और मुहावरा
सूर्यकांत द्विवेदी
पुस्तक
AMRESH KUMAR VERMA
तुम्हारी छवि
Rashmi Sanjay
Loading...